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Friday, June 2, 2023

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आईआईटी जोधपुर का नया रिसर्च

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जोधपुर के शोधकर्ताओं ने लैथेनाइड्स आधारित पेरोव्स्काइट नैनोकम्पोजिट कैटेलिटिक मटीरियल्स का विकास किया है, जो आर्टिफिशियल फोटोसिंथेसिस से अधिक शुद्ध हाइड्रोजन के उत्पादन में सहायक है। इस पेटेंट पद्धति में शोधकर्ताओं ने सूरज की रोशनी से पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में बदला है। इसमें एक सस्ता, सरल ट्रांजिशन मेटल पर आधारित रीसाइक्लिबल कैटेलिस्ट का उपयोग किया गया। प्रोजेक्ट के मुख्य परीक्षक आईआईटी जोधपुर में रसायन विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ राकेश के शर्मा ने आईआईटी जोधपुर की डॉ. किरण शेजले, डॉ देविका लैशराम, भागीरथ सैनी और डॉ. कृष्णप्रिया के साथ कटलिस्टों की एक सीरीज विकसित की है, जिससे सामान्य परिवेश में हाइड्रोजन उत्पादन करने में सक्षमता मिलेगी। इस शोध का व्यावहारिक लाभ उद्योग जगत, ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्रों को मिलेगा। ग्रीन और सस्टेनेबल ऊर्जा का एकमात्र भावी स्रोत हाइड्रोजन आधारित ऊर्जा है लेकिन चूंकि 90 प्रतिशत से अधिक हाइड्रोजन का स्रोत पेट्रोलियम फीडस्टॉक है इसलिए यह महंगा पड़ता है और आम आदमी की पहुंच से बाहर है। आईआईटी जोधपुर की शोध टीम हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए एक व्यावहारिक स्रोत की खोज में लगी रही है। अब टीम द्वारा विकसित टेक्नोलॉजी के परिणामस्वरूप सूरज की रोशनी के अलावा किसी बाहरी ऊर्जा स्रोत की जरूरत नहीं होगी।

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